पोपला बच्चा

अशोक चक्रधर जी की कलम से ...

POEMS/कविता

अशोक चक्रधर

1/27/20261 मिनट पढ़ें

photo of white staircase
photo of white staircase

बच्चा देखता है
कि मां उसको हंसाने की
कोशिश कर रही है।
भरपूर कर रही है,
पुरज़ोर कर रही है,
गुलगुली बदन में
हर ओर कर रही है।

मां की नादानी को
ग़ौर से देखता है बच्चा,
फिर कृपापूर्वक
अचानक…
अपने पोपले मुंह से
फट से हंस देता है।
सोचता है
ख़ूब फंसी
मां भी मुझमें ख़ूब फंसी,
फिर दिशाओं में गूंजती है
फेनिल हंसी।
मां की भी
पोपले बच्चे की भी।