वैराग्य और जीवन की कठिनाइयाँ - शायरी

यह शायरी वैराग्य और अनुराग के संघर्ष में जीवन की कठिनाइयों का मार्मिक चित्रण करती है। बैरागी मन और अनुरागी तन के द्वंद्व, दुनियादारी की बनावटी शिष्टता और आत्मीय असंतोष का गहन प्रतिबिंब प्रस्तुत करती है।

POEMS/कविता

निदा फाजली

1/29/20261 मिनट पढ़ें

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मन बैरागी, तन अनुरागी, कदम-कदम दुशवारी है
जीवन जीना सहल न जानो बहुत बड़ी फनकारी है

औरों जैसे होकर भी हम बा-इज़्ज़त हैं बस्ती में
कुछ लोगों का सीधापन है, कुछ अपनी अय्यारी है

जब-जब मौसम झूमा हम ने कपड़े फाड़े शोर किया
हर मौसम शाइस्ता रहना कोरी दुनियादारी है

ऐब नहीं है उसमें कोई, लाल परी न फूल गली
यह मत पूछो, वह अच्छा है या अच्छी नादारी

जो चेहरा देखा वह तोड़ा, नगर-नगर वीरान किए
पहले औरों से नाखुश थे अब खुद से बेज़ारी है।