निदा फाजली की कविता: आधुनिक दुनिया की नई शुरुआत
निदा फाजली की यह कविता आधुनिक दुनिया के प्रदूषण और हिंसा को प्रतीकात्मक रूप से चित्रित करती है, जहाँ नई शुरुआत की पुकार है। यह कविता नई पीढ़ी की आशा और पुरानी विरासत की मरम्मत की भावना को उजागर करती है।
POEMS/कविता
निदा फाजली
1/29/20261 मिनट पढ़ें


बहुत मैला है ये सूरज
किसी दरिया के पानी में
उसे धोकर सजाएँ फिर
गगन में चाँद भी
कुछ धुँधला-धुँधला है
मिटा के इस के सारे दाग-धब्बे
जगमगाएँ फिर
हवाएं सो रहीं हैं पर्वतों पर
पाँव फैलाए
जगा के इन को नीचे लाएँ
पेड़ों में बसाएँ फिर
धमाके कच्ची नींदों में
उड़ा देते हैं बच्चों को
धमाके खत्म कर के
लोरियों को गुनगुनाएँ फिर
वो जबसे आई है
यूँ लग रहा है
अपनी ये दुनिया
जो सदियों की अमानत है
जो हम सब की विरासत है
पुरानी हो चुकी है
इसमें अब
थोड़ी मरम्मत की ज़रूरत है
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